हिस्टेरोस्कोपी क्या होता है? गर्भधारण में कैसे मदद करती है? | आज ही जाने  फर्टिलिटी  विशेषज्ञ डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा से

Dr Puneet Rana Arora

Medically Reviewed


By Dr. Puneet Rana Arora : Founder & Director, CIFAR — Centre for Infertility & Assisted Reproduction, Gurugram FRCOG (Royal College of Obstetricians & Gynaecologists, UK) | MSc Reproduction & Development, University of Bristol, UK

Last Review Date : 30 July, 2026

क्या आप लंबे समय से प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही?

यदि आपकी सभी रिपोर्ट सामान्य हैं, कई महीनों या वर्षों से प्रयास करने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पा रहा है, या IVF के एक या अधिक प्रयास असफल हो चुके हैं, तो समस्या गर्भाशय (Uterus) के अंदर भी हो सकती है।

ऐसी स्थिति में हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy) एक महत्वपूर्ण जांच और उपचार प्रक्रिया है, जो गर्भाशय की अंदरूनी समस्याओं का सटीक पता लगाने में मदद करती है।

डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा, वरिष्ठ IVF एवं फर्टिलिटी विशेषज्ञ और CIFAR , गुरुग्राम के संस्थापक, बताते हैं कि कई ऐसी समस्याएँ जो सामान्य अल्ट्रासाउंड में दिखाई नहीं देतीं, उन्हें हिस्टेरोस्कोपी के माध्यम से आसानी से पहचाना और ठीक किया जा सकता है।

हिस्टेरोस्कोपी क्या होता है?

हिस्टेरोस्कोपी एक आधुनिक और मिनिमली इनवेसिव (Minimal Invasive) प्रक्रिया है, जिसमें एक पतला कैमरा (Hysteroscope) गर्भाशय के अंदर डाला जाता है। इससे डॉक्टर बिना किसी बड़े चीरे के गर्भाशय की अंदरूनी परत (Endometrial Cavity) को सीधे देख सकते हैं।

इस जांच के दौरान यदि कोई समस्या मिलती है, तो कई मामलों में उसी समय उसका उपचार भी किया जा सकता है।

इन्फर्टिलिटी में हिस्टेरोस्कोपी क्यों जरूरी होती है?

गर्भधारण के लिए स्वस्थ गर्भाशय अत्यंत आवश्यक है। यदि गर्भाशय के अंदर कोई असामान्यता है, तो भ्रूण (Embryo) का Implantation प्रभावित हो सकता है।

हिस्टेरोस्कोपी के माध्यम से निम्न समस्याओं का पता लगाया जा सकता है—

  • गर्भाशय के अंदर चिपकाव (Adhesions)
  • एंडोमेट्रियल पॉलीप (Endometrial Polyps)
  • गर्भाशय का सेप्टम (Uterine Septum)
  • असामान्य ऊतक (Abnormal Tissue)
  • गर्भाशय की जन्मजात संरचनात्मक समस्याएँ
  • एंडोमेट्रियल कैविटी की अन्य असामान्यताएँ

इन समस्याओं का समय पर उपचार IVF और प्राकृतिक गर्भधारण दोनों की सफलता बढ़ा सकता है।

क्या अल्ट्रासाउंड पर्याप्त नहीं है?

आज 3D और 4D अल्ट्रासाउंड काफी उन्नत हैं, लेकिन हर समस्या उनमें दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है।

कई बार गर्भाशय के अंदर मौजूद छोटी-छोटी असामान्यताएँ अल्ट्रासाउंड में छूट जाती हैं।

हिस्टेरोस्कोपी डॉक्टर को गर्भाशय के अंदर सीधे देखने का अवसर देती है, इसलिए इसे गर्भाशय की जांच का सबसे विश्वसनीय तरीका माना जाता है।

IVF से पहले हिस्टेरोस्कोपी क्यों कराई जाती है?

IVF में भ्रूण को गर्भाशय के अंदर स्थापित (Embryo Transfer) किया जाता है।

यदि गर्भाशय का वातावरण स्वस्थ नहीं होगा, तो अच्छी गुणवत्ता का भ्रूण भी सफलतापूर्वक Implant नहीं हो पाएगा।

इसी कारण कई फर्टिलिटी विशेषज्ञ IVF शुरू करने से पहले गर्भाशय की विस्तृत जांच की सलाह देते हैं।

एक वास्तविक सफलता की कहानी

डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा के पास एक मरीज आई, जिसकी सभी रिपोर्ट और अल्ट्रासाउंड सामान्य थे।

लेकिन हिस्टेरोस्कोपी करने पर गर्भाशय के अंदर सेप्टम (Septum) पाया गया।

हिस्टेरोस्कोपी द्वारा सेप्टम हटाने के बाद लगभग दो महीने तक गर्भाशय को ठीक होने का समय दिया गया।

इसके बाद मरीज ने प्राकृतिक रूप से गर्भधारण का प्रयास किया और तीसरे महीने में ही सफलतापूर्वक प्रेग्नेंसी हो गई।

यह उदाहरण बताता है कि कई बार छोटी-सी छिपी हुई समस्या भी गर्भधारण में बड़ी बाधा बन सकती है।

सर्वाइकल स्टेनोसिस क्या है?

कुछ महिलाओं में सर्वाइकल स्टेनोसिस (Cervical Stenosis) नामक समस्या होती है, जिसमें गर्भाशय का रास्ता संकरा या बंद हो जाता है।

इससे—

  • शुक्राणुओं का गर्भाशय तक पहुँचना कठिन हो सकता है।
  • IVF के दौरान Embryo Transfer मुश्किल हो सकता है।

हिस्टेरोस्कोपी द्वारा इस रुकावट को दूर किया जा सकता है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण और IVF दोनों की सफलता बेहतर हो सकती है।

किन महिलाओं को हिस्टेरोस्कोपी करवाने पर विचार करना चाहिए?

यदि—

  • एक वर्ष से अधिक समय से गर्भधारण नहीं हो रहा।
  • बार-बार IVF असफल हो रहा है।
  • बार-बार गर्भपात हो रहा है।
  • गर्भाशय में पॉलीप या फाइब्रॉइड का संदेह है।
  • अनियमित या अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है।
  • डॉक्टर ने गर्भाशय की विस्तृत जांच की सलाह दी है।

तो हिस्टेरोस्कोपी एक महत्वपूर्ण जांच हो सकती है।

क्या हिस्टेरोस्कोपी दर्दनाक होती है?

अधिकांश मामलों में हिस्टेरोस्कोपी डे-केयर प्रक्रिया होती है।

  • प्रक्रिया सामान्यतः 15–30 मिनट में पूरी हो जाती है।
  • अधिकांश मरीज उसी दिन घर जा सकते हैं।
  • रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेज होती है।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार कुछ दिनों में सामान्य दिनचर्या शुरू की जा सकती है।

गुरुग्राम में हिस्टेरोस्कोपी कहाँ कराएँ?

यदि आप गुरुग्राम, दिल्ली NCR, फरीदाबाद, मानेसर, रेवाड़ी, सोहना, पलवल, बहादुरगढ़ या हरियाणा के आसपास रहते हैं और लंबे समय से गर्भधारण में कठिनाई का सामना कर रहे हैं, तो अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ द्वारा गर्भाशय की सही जांच करवाना बेहद महत्वपूर्ण है।

डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा, संस्थापक एवं निदेशक, CIFAR, Gurugram, 25 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ IVF, Reproductive Medicine, Hysteroscopy एवं Fertility Preservation में विशेषज्ञता रखते हैं। आधुनिक तकनीक और व्यक्तिगत उपचार योजना के माध्यम से वे प्रत्येक मरीज के लिए सर्वोत्तम उपचार विकल्प प्रदान करते हैं।

निष्कर्ष

हिस्टेरोस्कोपी केवल एक जांच नहीं, बल्कि गर्भधारण में बाधा बनने वाली कई छिपी हुई समस्याओं की पहचान और उपचार का प्रभावी माध्यम है।

यदि आपकी प्रेग्नेंसी बार-बार रुक रही है, IVF सफल नहीं हो रहा है, या सभी रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पा रहा है, तो हिस्टेरोस्कोपी आपके उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।

समय पर सही जांच और विशेषज्ञ की सलाह आपकी पेरेंटहुड जर्नी को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. हिस्टेरोस्कोपी क्या होती है?

यह गर्भाशय के अंदर कैमरे की सहायता से की जाने वाली जांच और उपचार प्रक्रिया है।

2. क्या हिस्टेरोस्कोपी IVF से पहले जरूरी होती है?

हर मरीज के लिए जरूरी नहीं, लेकिन बार-बार IVF असफल होने या गर्भाशय की समस्या का संदेह होने पर डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं।

3. क्या हिस्टेरोस्कोपी सुरक्षित है?

हाँ, अनुभवी विशेषज्ञ द्वारा किए जाने पर यह सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया मानी जाती है।

4. हिस्टेरोस्कोपी के बाद कितने दिनों में सामान्य जीवन शुरू किया जा सकता है?

अधिकांश महिलाएँ 1–2 दिनों में सामान्य गतिविधियाँ शुरू कर सकती हैं। डॉक्टर की सलाह का पालन करना आवश्यक है।

5. क्या हिस्टेरोस्कोपी से प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है?

यदि गर्भाशय के अंदर मौजूद कोई समस्या गर्भधारण में बाधा बन रही हो, तो उसके उपचार के बाद प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना बेहतर हो सकती है।

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